Euphonic

[ जम्भ-कृपा ]
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वील्होजी :- चारोँ युगोँ और दसावतार – के समान्य एंव कलियुग के विशेष उल्लेख सहित जम्भ-महिमा वर्णित है ।
” सत्युग “
मेँ भगवान के मत्स्य , कूर्म , वराह और नृसिह -चार अवतार हुए । इस युग मेँ भगवान ने प्रह्लाद की प्रार्थना पर पाँच करोड जीवोँ को मोक्ष प्रदान किया ।
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त्रेता युग – मेँ वामन , परशुराम तथा राम-लक्ष्मण तीन अवतार हुए । गुरु ने राजा हरिश्चनद्र पर कृपा की जिनके साथ सात करोड जीवोँ को मोक्ष मिला ।
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द्वापर युग- मेँ कृष्ण और बुध दो अवतार हुए । इसमेँ गुरु की राजा युधिष्ठिर पर कृपा हुई , जिनके साथ नौ करोड जीवोँ का उद्धार हुआ ।
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कलियुग – मेँ ” निकलंकी ” अवतार होगा । इसमेँ शेष बारह करोड जीवोँ का उद्धार होना है ।
इनके उद्धार के लिए “जाम्भोजी संभराथल ” पर आए हैँ ।
जिन्होँने उनको नही पहचाना , वे आवागमन के चक्कर मेँ पडे रहेँगे ।
कलियुग- मेँ कसाई ज्ञान-कथन करेँगे और निशंक गाय-हत्या करेँगे । अवतार की आड मेँ लोग पाप-कर्म करेँगे , वे शक्तिशाली लोगोँ का साथ देँगे । खूनी ” जमला ” रचायँगे ।
इस युग मेँ सतपंथ से भ्रष्ट कुगुरुओँ द्वारा भ्रमाए गए लोग अनेक प्रकार के पाखण्ड करते है । ऐसे समय मेँ प्रत्य्क्ष गुरु निर्गुण विसंन – जाम्भोजी के रुप आए है , किन्तु गंवार लोग समझते नहीँ ।
हीरा तो जौहरी ही पहचान सकता है ।
गुरु ने स्वयं विषपान करके दूसरोँ को अंमृत पिलाया , ऐसे कैवल्य ज्ञानी के अतिरिक्त ज्ञान – कथन करने वाले झूठे है ।
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वील्होजी – रचना का महत्व सम्प्रदाय मेँ मान्य तेतीस कोटि जीवोँ के उद्धार सम्बन्धी मान्यता और दसावतार वर्णन के लिए है । उल्लेखनीय है कि जाम्भोजी की गणना अवतार मेँ न करके उनको-
” सांपरति सतगुरु ” – निर्गुण विसंन बताया है , जिन्होने ‘ जोगरुप ‘ मेँ उपदेश दिया ।
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” नाथैजी मुख ग्यांन सुणि , परचे वीठलदास ।
पंथ उजालण आवियो , वील्ह नाम परकास ॥
Note….
ये लेख – जाम्भोजी ,विशनोई सम्प्रदाय और साहित्य । ग्रंथ से लिया गया है ॥

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