श्री कृष्ण एवं जाम्भोजी धर्म व्यक्ति को जीवन जीने की सही राह बताता है और व्यक्ति में व्याप्त संभावनाओ को अंतिम परिणाम तक लेकर जाता है. अक्सर हर धर्म में जोर जीवन की नश्वरता, क्षणभंगुरता व् स्वर्ग नरक के भय पर रखा जाता है परन्तु अगर व्यक्ति एवं धर्म के हँसते हुए स्वरूप का दर्शन करना […]

जम्भैशवर भगवान का पवित्र खाण्डा, जो दूदोजी को भेण्ट किया :- •••••••••••••••••••••••••““““`•••••••••••••••• ~भगवान जम्भेश्वर ने बाल्यावस्था से ही अद्भुत चमत्कार करने शुरू कर दिये थे। मेड़ता के राव दूदो का राज्य भाईयों द्वारा छिन कर दूदो को देश निकाला दे दिया था। दूदो अपने भाई के पास बीकानेर जा रहा था। पीपासर की रोही में

The holy Khanda of Lord guruJambheshwar, which was presented to DoodojiRead More »

उपासना को साधारण शब्दों में व्यक्ति के द्वारा अपनी आध्यात्मिक संतुष्टि हेतु किया गया चिंतन व मनन कह सकते है। हालांकि यदि हम जाम्भोजी के काल में प्रचलित उपासना विधि को देखें तो यह केवल एक प्रक्रिया मात्र नजर आती है जिसका उद्देश्य कोई आध्यात्मिक संतुष्टि न होकर केवल भौतिक साधनों की प्राप्ति नजर आती

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[ जम्भ-कृपा ] ¤¤¤ वील्होजी :- चारोँ युगोँ और दसावतार – के समान्य एंव कलियुग के विशेष उल्लेख सहित जम्भ-महिमा वर्णित है । ” सत्युग ” मेँ भगवान के मत्स्य , कूर्म , वराह और नृसिह -चार अवतार हुए । इस युग मेँ भगवान ने प्रह्लाद की प्रार्थना पर पाँच करोड जीवोँ को मोक्ष प्रदान

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[पत्थर के देव न पूजेँ ] ¤¤¤¤ जाम्भाणी रुप :- नारायण के अनन्त नाम और अवतार है । लोक-लज्जा त्याग कर दृढ विशवास , निष्ठा और प्रेम से उसका नाम स्मरण करना चाहिए । ‘ अलख , अजोनी , स्वयंभू नारायण ‘ ने अनेक अवतार रुपोँ मेँ बहुविध अनेक कार्य पूरे किए हैँ , किन्तु

Do not worship god of stoneRead More »